गायत्री महामंत्र

ऋग्वेद (महर्षि विश्वामित्र)
अन्य मंत्र मंत्र गायत्री
॥ दोहा ॥

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

॥ चौपाई ॥

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

सरल भावार्थ:
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।

मंत्र का आध्यात्मिक रहस्य:
गायत्री मंत्र चारों वेदों का सार है। इसके २४ अक्षर चौबीस शक्तियों के प्रतीक हैं। इसका नियमित जप मन को शांत, बुद्धि को प्रखर और जीवन को दिव्य प्रकाश से आलोकित करता है।

॥ दोहा ॥

ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

गायत्री मंत्र हिंदू धर्म का सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पूज्य वैदिक महामंत्र है जो बुद्धि को सत्य और सत्कर्म की ओर अग्रसर करता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।