॥ दोहा ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
॥ चौपाई ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
सरल भावार्थ:
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
मंत्र का आध्यात्मिक रहस्य:
गायत्री मंत्र चारों वेदों का सार है। इसके २४ अक्षर चौबीस शक्तियों के प्रतीक हैं। इसका नियमित जप मन को शांत, बुद्धि को प्रखर और जीवन को दिव्य प्रकाश से आलोकित करता है।
॥ दोहा ॥
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः॥