॥ पावन पाठ ॥
तोड़ी न टूटे छोड़ी न छूटे,
ऐसी माधव की चितली ,
यु ललन सो प्रीत बनी
बलि बलि जाऊ श्याम सूंदर पे,
अथक कथा जाके बात सुनी,
तोड़ी न टूटे छोड़ी न छूटे,
ऐसी माधव की चितली ,
यु ललन सो प्रीत बनी
तोड़ी न टूटे छोड़ी न छूटे,
ऐसी माधव की चितली ,
यु ललन सो प्रीत बनी
बलि बलि जाऊ श्याम सूंदर पे,
अथक कथा जाके बात सुनी,
तोड़ी न टूटे छोड़ी न छूटे,
ऐसी माधव की चितली ,
यु ललन सो प्रीत बनी