पीहर ना जाओ गौरा तेरा मेरा निरादर है

पारंपरिक
महादेव मंत्र शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पीहर ना जाओ गौरा तेरा मेरा निरादर है

गौरा तेरे बाबुल ने यज्ञ रचाया है

सब को निमंत्रण दिया नहीं हमको बुलाया है

पीहर ना जाओ गोरा

बेटी घर बाबुल के बिन बुलाए चली जाती है

गोरा ने नहीं माना पीहर चली जाती है

पीहर ना जाओ गौरा

माता तो हंस बोली पिता मुख से नहीं बोले

छोटी बहना ने कटु वचन सुनाए हैं

पीहर न जाओ गौरा

गौरा ने जब देखा कहीं भोले का आसन नहीं

यग्य हो रहा.था गौरा बाई में कूद पड़ी

पीहर न जाओ गौरा

शंकर जो सुन पाए वीरभद्र को भेजा है

यज्ञ विध्वंश किया राजा दक्ष को मारा है

पीहर न जाओ गौरा तेरा मेरा निरादर है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।