जय जय अमरनाथ जय जय अमरनाथ

पारंपरिक
महादेव कथा शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाथा दा तू नाथ कहावे अमरनाथ विच डेरे,

नाम तेरे दा चानन बन जे मिट दे कुक हनेरे,

शाम सव्रेरे शंकर तेरा करदा रहा मैं जाप,

जय जय अमरनाथ जय जय अमरनाथ,

माँ शक्ति नु जिथे बह के आप ने कथा सुनाई,

उस जगह नु सजदे करदी फिरदी कुल लुकाई.,

सब न दे तू करदे भोले खुशिया दी बरसात,

जय जय अमरनाथ जय जय अमरनाथ,

उचे नीवे विच रस्ते दे बर्फ ने पैर पसारे,

फिर भी भगत प्यारे तनु पूजन आउंदे सारे.

महरा दी तू भोले शंकर पा दे इक बार झात,

जय जय अमरनाथ जय जय अमरनाथ,

डमरू वाले बाबा सब तो ऊंचा तेरा द्वारा,

दीं दुखी नु मिलदा आके ेथो पार किनारा ,

कुलदीप भी लेके जावे खुशियां दी सौगात,

जय जय अमरनाथ जय जय अमरनाथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।