पान खा ले पंडा पान खा ले

पारंपरिक
माता दुर्गा कथा दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पान खा ले पंडा पान खा ले,

मुँह करले लाल लाल पान खा ले,

मीठा खाने होये तो मीठा बनवा,

सादा खाना होये तो सादा बनवाओ,

और कच्ची सुपारी चाहे भुंजी दवाओ,

पान खा ले पंडा पान खा ले,

कटनी को चुना कलकतियाँ है पान ,

सुहाग कुरी कथा रखते है तोहरी शान,पंडा पान खा ले,

पान खा ले पंडा पान खा ले,

सोंफ और सुपारी लॉन्ग इलायची डलवाओ,

जा पुराणी चाहे रिमझिम ढलवाओ,पंडा पान खा ले,

पान खा ले पंडा पान खा ले,

कैसे खाओ पंडा बता दियो पान,

अरे पांच भगत की तुम रख दइयो मान पंडा पान खा ले,

पान खा ले पंडा पान खा ले,

पागल सु लड़का जब बोहतिये परेशान,

झाग फूंक के निकालो तुम इनकी परेशान पंडा पान खा ले,

पान खा ले पंडा पान खा ले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।