काछबा काछ्बी रि कथा

पारंपरिक
श्री कृष्ण कथा विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

काछबो न काछबी रहता समंद में , लेता हरि रो नाम

भक्ति रे कारण बाहर आया , कीन्हा संतो ने प्रणाम

संतो रे शरणे पङिया जी , झटक झोळी में भरिया जी

कळप मत काछब कूङी ओ , सांवरिया री रीतां रूङी ओ

भक्ति रो भेद नी पायो जी , सांवरियो नेचे आयो जी

संत लेय हांडी में धरिया , तळे लगाई आग

केवे काछबी सुण रे काछबा , थांरे हरी नें बताय

कठे थांरो सारंग प्राणी रे ,मौत री आ ही निशाणी रे

भक्ति रो भेद नी पायो जी , सांवरियो नेचे आयो जी

आडी जळूं मैं ऊबी जळूं रे , जळ गई जाळोजाळ

कदे नी आवे सांवरो थांरो , प्राण निकळ्यो जाय

कठे थांरो मोहन प्राणी रे ,मीठोङी मुरली वाणी रे

कळप मत काछब कूङी ओ , सांवरिया री रीतां रूङी ओ

बळती होवे तो बैठ ज्या पीठ पर , राखूं थांरो प्राण

निंद्रा मत कर म्हारे नाथ री , राखूं थांरो प्राण

हरी म्हारो आसी वारूं रे , जीवों ने तारण वाळो रे

कळप मत काछब कूङी रे , सांवरिया री रीतां रूङी रे

काची नींद में सूतो सांवरो , मोङी सुणी रे पुकार

बळती अगन सूं तारिया जी , काछब नें किरतार

वाणी भोजो जी गावे रे , टीकम दा राय बतावे रे

लहरी मेहरा गाय सुणावे रे , चँचल भाई म्युजिक बजावे रे

कळप मत काछब कूङी रे , सांवरिया री रीतां रूङी रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।