अमरकथा श्री धोली सती दादी की

सौरभ मधुकर
माता दुर्गा कथा रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भजो मन दादी दादी नाम

जपो मन दादी दादी नाम

जय जय जय धोली सती दादी

जय फतेहपुर धाम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

कथा है धोली सती की

है ये कलयुग की कहानी

राज्य हरयाणा में जन्मी फतेहपुर की महारानी

पिता किशन लाल जी के घर गूंजी किलकारी

माँ सरस्वती के मन में छा गयी खुशियां भारी

शक्ति अंश से जन्मी कन्या,धोली रक्खा नाम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

किशन जी के आँगन में समय शुभ दिन वो आया

धोली का नाथूराम जी के संग में ब्याह रचाया

बिदा की घड़ी जो आई, आँख सब की भर आई

बोहोत मन को समझा कर करी बेटी की बिदाई

चल पड़ी धोली की डोली,संग हैं नाथूराम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

हुक्म ये राजा का है,ये डोली यहीं रुकेगी

रात महल में रहकर पालकी आगे बढ़ेगी

जो मेरी राहें रोकी,तो फिर संग्राम होगा,

संभल जा अब भी राजा,बुरा अंजाम होगा

नाथूराम और मानसिंह में मचा महासंग्राम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

रूप चंडी का धारा,मानसिंह को संहारा

सती के तेज़ से धरती,लाल हुआ अम्बर सारा

बैठ गयी अग्नि रथ पर,ज्योत से ज्योत मिलायी

गूँज उठा जयकारा,जय श्री धोली सती माई

सतवंती माँ धोली सती की सत की महिमा महान

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

धन्य है फतेहपुर नगरी,धन्य वो शेखावाटी

जहां कण-कण में बसी है मेरी धोली सती दादी

बिंदल कुलदेवी माँ की है महिमा बड़ी निराली

कृपा भगतों पर करती दादी फतेहपुर वाली

"सौरभ मधुकर" दादी के गुण गाये सुबहो शाम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

जय जय जय धोली सती दादी

जय फतेहपुर धाम

जपो मन दादी दादी नाम

भजो मन दादी दादी नाम

गीतकार - सौरभ मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।