जग ने मुझको ठुकराया

पारंपरिक
श्री कृष्ण कथा कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जग ने मुझको ठुकराया मैं श्याम शरण तेरी आया,

सब कुछ दुनिया ने लुटा पतवार तुम्हे ही बनाया,

जग ने मुझको ठुकराया मैं श्याम शरण तेरी आया,

करो याद वो कथा पुरानी जब अबला नारी तारी,

जा पर मैं हार गई तो कन्हियाँ कन्हियाँ पुकारी,

दीनो के नाथ तुम ही हो तो आके चीर थमाया,

सब कुछ दुनिया ने लुटा पतवार तुम्हे ही बनाया,

जग ने मुझको ठुकराया मैं श्याम शरण तेरी आया,

क्या श्याम तेरी ये माया तेरा खेल समझ न पाये

क्या रिश्ता सुदामा का था मेरा चिंतन मन ये गाये,

पहले तुम ने ली परीक्षा फिर उसको गले लगाया,

सब कुछ दुनिया ने लुटा पतवार तुम्हे ही बनाया,

जग ने मुझको ठुकराया मैं श्याम शरण तेरी आया,

ऐसे मोड़ो पे आज खड़े है अब किस्से नाता जोड़े,

पल पल है ये तन्हाई बाबा तुमसे प्रीत है जोड़े

हुई बोर यु सजन बोला कण कण में श्याम समाया

सब कुछ दुनिया ने लुटा पतवार तुम्हे ही बनाया,

जग ने मुझको ठुकराया मैं श्याम शरण तेरी आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।