जदो वज्दा मन नु भावे जोगी दा चिमटा

पारंपरिक
महादेव मंत्र बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जदो वज्दा मन नु भावे जोगी दा चिमटा,

इस चिमटे दे रंग निराले बक्शया है शिव डमरू वाले,

एह सब नु मस्त बनावे जोगी दा चिमटा,

इस चिमटे नु लगियाँ पत्तियां नीता जिह्ना भगता दियां सचियाँ,

ओह बेड़े बने लावे जोगी दा चिमटा,

इस चिमटे नु लगैयन मेख़ा जंतर मंत्र भूत प्रेता,

एह पल विच दूर भजावे जोगी दा चिमटा,

इस चिमटे नु पाये छल्ले उसदी हो गई बल्ले बल्ले,

तरसेम जेहड़ा गुण गावे, जोगी दा चिमटा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।