हनुमत डटे रहो आसन पर

संत तुलसीदास
हनुमान जी कथा हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हनुमत डटे रहो आसन पर

जब तक कथा राम की होय

माथे इनके मुकुट विराजे

कानन कुंडल सोहे

एक काँधे पर राम विराजे

दूजे लक्ष्मण होय........

एक काँधे पर मुगदर सोहे

दूजे परवत होय

लड्डुअन का तेरो भोग लगत है

हाथ पसारे लोग ........

तुलसीदास आस रघुवर की

हरि चरनन चित होय

अंग तुम्हारे चोला सोहे

लाल लंगोटा होय.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।