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1777
नाम रस मीठा रे
संत सूरदास
श्री कृष्ण
1778
पल पल तेरे साथ मैं
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1779
टूट गया जग से भरोसा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1780
हरी नाम सुमर सुखधाम जगत
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1781
मांग ले कन्हियान से ये सब को ही देता है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1782
जय श्री वल्लभ जय श्री विट्ठल
संत सूरदास
श्री कृष्ण
1783
ले चल अपने नागरियाँ बांके बिहारी सांवरियां
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1784
राखे सब की लाज
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1785
दया करो हे दयालु भगवन
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1786
श्याम तो पे वारी वारी जाऊं मैं
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1787
मैं हरि पतित पावन सुने
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1788
श्याम तेरी एसी खटक लागी छोड़ घर खाटू में आगी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1789
किसने तुझको सजाया सांवरे मेरे श्याम
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1790
सांवरिये दीदार तेरा पाने आए हैं
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1791
प्रबल प्रेम के पाले पड़ कर
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1792
मोहे सब घट श्याम ही दीखे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1793
दरशन दीजो आय प्यारे
मीरा बाई
श्री कृष्ण
1794
कमल लोचन कटि पीताम्बर
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1795
तुम मेरी राखो लाज हरि
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1796
करुणा भरी पुकार सुन अब तो पधारो मोहना
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1797
करुणा सुनो श्याम मेरी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1798
तेरी मेरी कट्टी है जायेगी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1799
खाटू वालो श्याम रात सपने में आगेयो से
पारंपरिक
श्री कृष्ण
1800
अंखियाँ हरि दरसन की प्यासी
संत सूरदास
श्री कृष्ण