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मोर मुकुट वाले प्रीतम पारंपरिक
श्री कृष्ण
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श्याम खाटू से घर कब आओगे तुम पारंपरिक
श्री कृष्ण
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गोपाल कन्हैयो नंदजी रो पारंपरिक
श्री कृष्ण
14140
जब कोई तकलीफ सताए जब जब मन घबराता है पारंपरिक
श्री कृष्ण
14141
कलयुग में एक बार कन्हैया पारंपरिक
श्री कृष्ण
14142
बाधो मजा न देगा सावन मजा न देगा पारंपरिक
श्री कृष्ण
14143
नैना बावरे हुए हैं मेरे ओ साँवरे पारंपरिक
श्री कृष्ण
14144
आओ गोपाल तरस रहे नैना अलका गोएल
श्री कृष्ण
14145
जिनका दिल मोहन की चौखट का दीवाना हो गया पारंपरिक
श्री कृष्ण
14146
कन्हियाँ मेरी लाज रखना पारंपरिक
श्री कृष्ण
14147
मेरा खाटू वाला श्याम पारंपरिक
श्री कृष्ण
14148
मेरे कष्ट हरो श्री श्याम मैं बालक हु दुखराया पारंपरिक
श्री कृष्ण
14149
हम श्याम दीवाने है हम श्याम दीवाने है पारंपरिक
श्री कृष्ण
14150
मेरे सँवारे मुझको देदो सहारा पारंपरिक
श्री कृष्ण
14151
लिख लिख के चिठ्ठी भेजू मैं स्वीकार कीजिये पारंपरिक
श्री कृष्ण
14152
कुछ भी नहीं चाहे दुनिया में पारंपरिक
श्री कृष्ण
14153
मेरे बाबा की खाटू नगरी है पारंपरिक
श्री कृष्ण
14154
संवारा लेले परीक्षा जितना जी करे पारंपरिक
श्री कृष्ण
14155
शरण साँवरे की तुम आकर देखो पारंपरिक
श्री कृष्ण
14156
यूँ ही नहीं पूजते है लोग ज़माने वाले पारंपरिक
श्री कृष्ण
14157
तेरी मेरी कट्टी पारंपरिक
श्री कृष्ण
14158
कीड़ी ने कण हाथी ने मण पारंपरिक
श्री कृष्ण
14159
तूँ है मेरा खिवईया पारंपरिक
श्री कृष्ण
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खाटू में जाके देखो फागण में क्या मजो है पारंपरिक
श्री कृष्ण