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चलो जी चलो चलो वृद्धावन
पारंपरिक
श्री कृष्ण
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मैया दूल्हा मोहे बनायदे
पं अशोक कृष्ण ठाकुर जी महाराज
श्री कृष्ण
12699
आजा सावरे रो रो अखिया पुकारदी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12700
मटकी आप चटक गयी होयगी
पं पूज्य श्री अशोक कृष्ण ठाकुर जी
श्री कृष्ण
12701
कन्हैया किसको कहेगा तू मैया
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12702
हमारे घर में भी रोटी तेरे खाटू से आती है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12703
तेरी सेवा की बस एह कन्हियाँ
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12704
ओ रे सँवारे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12705
तेरे चरणों का फूल श्याम जाऊ न दूर
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12706
यहाँ से मैं हारा तेरे दर पे आया
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12707
वेखना वे असा राधा तेरे श्याम नु
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12708
मेरी डूभी हुई नैया को किनारा दे दो
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12709
आयो मेरो श्याम
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12710
तू है मेरा मैं हु तेरी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12711
जग प्रेम बड़ा बलधारी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12712
बांह थामो मेरी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12713
सिर पे हाथ है तेरा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12714
सांवरिया तेरी चाहत ने
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12715
श्याम ये दूरियां
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12716
मेरे सांवरियां सरकार भरोसो तेरो है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12717
लेलो शरण कन्हियाँ दुनिया से हम है हारे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12718
हे गोविंद हे गोपाल अब तो जीवन हारे
गिरधर महाराज
श्री कृष्ण
12719
खाटू में हम बस जाते
पारंपरिक
श्री कृष्ण
12720
जब भी पड़ी कोई दरकार
पारंपरिक
श्री कृष्ण