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भर भर लै गए ओ मुट्ठियाँ
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7178
होली खेले लठमार
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7179
दिल तुमको दिया नंदलाला
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7180
मैं चिट्ठियां लिख लिख हारी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7181
गोकुल में भागवत मथुरा में गीता
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7182
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7183
राधा ने पकड़ा रंग डाला
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7184
कौन सुनेगा रे मेरी तुम बिन कान्हा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7185
फागण की मस्ती तेरे भक्तों में छाई है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7186
राधा मेरी पिचकारी बड़े रंगों वाली
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7187
श्याम मुझे छोटी सी गीता मंगवा दो
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7188
कान्हा तोसे होली कैसे खेलूं रे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7189
मेरे बाबा खाटू वाले भक्तों की सुनते हैं सदा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7190
श्याम धणी को संग में नचाओ आज
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7191
अब जग से गया मैं हार
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7192
खाटू में बैठा है कन्हाई
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7193
मेरे खाटू वाले श्याम मुझको अपना लेना
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7194
रंग रंगीला खाटू का मेला
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7195
ये फागण रोज़ रोज़ नहीं आना
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7196
मैं तो माहरे श्याम ने रिजवान आया हां,
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7197
खाटू में जाएंगे बाबा को रिझाएंगे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7198
जब से तेरा नाम लिया है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
7199
हरि खेल रहे ब्रज में होली
गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी
श्री कृष्ण
7200
मैं क्यों डरूं जब संग मेरा श्याम है
पारंपरिक
श्री कृष्ण