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मुरलिया राधे से बतलाए
पारंपरिक
श्री कृष्ण
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मैं होली कैसे खेलू री
संत सूरदास
श्री कृष्ण
6819
हो लखदातार
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6820
अगला जन्म भी सांवरे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6821
कब आओगे मुरलिया वाले
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6822
हरि के बिना रे तेरी कैसे हो जाए मुक्ति
संत कबीर
श्री कृष्ण
6823
श्याम गोकुल में फिर से तू आजा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6824
भगवान तुम्हारी गीता में
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6825
सारे जग में डंका बाजे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6826
हारे के सहारे मेरी सुनले पुकार
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6827
वो है श्यामधणी
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6828
दिन हो वो ग्यारस का
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6829
क्या ऐसी नाराज़ी है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6830
लो हारी मैं तो हारी हूँ
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6831
कबसे खड़ी हूँ थारे द्वार पे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6832
हे कान्हा मोहे, बहुत सतावत तोरी अखियां
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6833
जब जब हम पर विपदा आई
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6834
जरा सोचले होगी तेरी हंसाई
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6835
अँखियाँ दे विच सोना श्याम वसदा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6836
जय राधे जय राधे
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6837
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6838
चरणों से ना हटाना
पारंपरिक
श्री कृष्ण
6839
हाथों को मेरे जिसने है थामा
पारंपरिक
श्री कृष्ण
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मेरी और निहार मेरे नन्दकुमार
पारंपरिक
श्री कृष्ण