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4441
तू जो मिल जाए सारी दुनिया छोड़ दू कुछ मांगू नही दुबारा पारंपरिक
श्री कृष्ण
4442
मन रे भज ले हरी का नाम पारंपरिक
श्री कृष्ण
4443
मेरी उम्मीद का दीपक कभी बुजने नही देना पारंपरिक
श्री कृष्ण
4444
कान्हा चाहूं तुझे पारंपरिक
श्री कृष्ण
4445
चल गोवर्धन महाराज पारंपरिक
श्री कृष्ण
4446
हाल मेरे दिल का तमाम पारंपरिक
श्री कृष्ण
4447
मोरछाड़ी का जादू पारंपरिक
श्री कृष्ण
4448
श्याम सलोना खाटू वाला पारंपरिक
श्री कृष्ण
4449
बड़े प्यारे प्यारे श्याम पारंपरिक
श्री कृष्ण
4450
महीनो फागण को रंगीलो बाबो श्याम बुलावे रे पारंपरिक
श्री कृष्ण
4451
मेरा खाटू बाला श्याम पारंपरिक
श्री कृष्ण
4452
थारे घट में विराजे भगवान संत कबीर
श्री कृष्ण
4453
तू छोड़ फिकर चल खाटू में पारंपरिक
श्री कृष्ण
4454
मैया री मैं तो वृन्दावन चली जाऊँगी पारंपरिक
श्री कृष्ण
4455
थक गया हूँ चलते चलते पारंपरिक
श्री कृष्ण
4456
कृपा की दृष्टि मुझपे भी अगर इक बार हो जाए पारंपरिक
श्री कृष्ण
4457
मेन्नु सोणा सोणा लगदा है तू पारंपरिक
श्री कृष्ण
4458
संवारे संवारे तेरे बिना लागे नही जीया संवारे पारंपरिक
श्री कृष्ण
4459
बाबा थारी चाकरी में धनो मजा आवे पारंपरिक
श्री कृष्ण
4460
हारने मुझे तू क्यों देता नही पारंपरिक
श्री कृष्ण
4461
होने नहीं दे कभी तेरी हार पारंपरिक
श्री कृष्ण
4462
मोहन मुरली वालिया तूँ आजा वे पारंपरिक
श्री कृष्ण
4463
मैं तो हो गयी रे श्याम की दीवानी अलका गोएल
श्री कृष्ण
4464
नी मैं हस हस प्रीतां ला लइयां पारंपरिक
श्री कृष्ण