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भज राधे गोविंदा रे पगले भज राधे गोविंदा रे संत कबीर
श्री कृष्ण
290
कैसी बजाई तूने बांसुरी पारंपरिक
श्री कृष्ण
291
बांसुरियां फिर से बजा दे पारंपरिक
श्री कृष्ण
292
आ जाओ मोहन बाबा पारंपरिक
श्री कृष्ण
293
देता हर दम सांवरे तू हारे का साथ पारंपरिक
श्री कृष्ण
294
हारे का ये ही सहारा पारंपरिक
श्री कृष्ण
295
तुमसा दानी न देखा शीश दे दिया दान में पारंपरिक
श्री कृष्ण
296
सावन का महीना घटायें घनघोर पारंपरिक
श्री कृष्ण
297
चालो खाटू धाम रे सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण
298
सब का मालिक एक बंदे पारंपरिक
श्री कृष्ण
299
तेरे दरबार में इस सिर का झुकना भी जरुरी था, पारंपरिक
श्री कृष्ण
300
जात पात ना पूछे बाबो वो तो मौज करे पारंपरिक
श्री कृष्ण
301
चलो द्वारा संगतो पारंपरिक
श्री कृष्ण
302
जब से गए हो मेरे मोहन परदेश में पारंपरिक
श्री कृष्ण
303
करदो करदो इक करदो मेरा काम पारंपरिक
श्री कृष्ण
304
देखो म्हारो श्याम कइयां जच रहयो है पारंपरिक
श्री कृष्ण
305
सँवारे को दिल में वसा कर तो देखो पारंपरिक
श्री कृष्ण
306
राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे पारंपरिक
श्री कृष्ण
307
भजते भजते भजते भजते आ गये हम पारंपरिक
श्री कृष्ण
308
जोगन बानी रे मैं तो सँवारे की पारंपरिक
श्री कृष्ण
309
तू ही मेरा जीवन मेरा तू ही है सहारा पारंपरिक
श्री कृष्ण
310
श्यामा श्याम रटू मैं सुबह शाम रे पारंपरिक
श्री कृष्ण
311
राधे किरपा बरसादे हमे सँवारे से मिला दे पारंपरिक
श्री कृष्ण
312
मेरे लब पे आता है श्याम नाम पारंपरिक
श्री कृष्ण