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बजरंगी तेरा क्या कहना पारंपरिक
हनुमान जी
170
मंगल मूरति मारुतनंदन जय हनुमान पारंपरिक
हनुमान जी
171
वीर बलि है मेरे बांका पारंपरिक
हनुमान जी
172
करे किरपा सदा हनुमान ये तो सारा ही जग जाने पारंपरिक
हनुमान जी
173
अरे मेहंदीपुर वाले का ये दरबार निराला है पारंपरिक
हनुमान जी
174
भोग करो स्वीकार पारंपरिक
हनुमान जी
175
है बलकारी और भ्रमचारी सालासर का बजरंगी लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
176
घाटे वाले बाला जी मेरे पित्रां खोल पारंपरिक
हनुमान जी
177
जहां भुत प्रेत से भक्तो को मिलता छुटकारा पारंपरिक
हनुमान जी
178
जय बुलाता चल बाला की पारंपरिक
हनुमान जी
179
अब दया करो बजरंगबलि लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
180
जय हो माँ अंजनी का लाला लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
181
मेरे राम लला की जग में उँची शान चाहिए पारंपरिक
हनुमान जी
182
जय श्री राम बोलो जय श्री राम पारंपरिक
हनुमान जी
183
ऐसे महाबली बलि बजरंग को प्रणाम लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
184
जपे राम जी का नाम सुबहो शाम पारंपरिक
हनुमान जी
185
तुमसा दयालु कोई न जग में राम भक्त कहलाया है पारंपरिक
हनुमान जी
186
ये तो बाला जी अंजनी का लाल निकला पारंपरिक
हनुमान जी
187
तेरो धाम लागो प्यारो है गजब नजारो पारंपरिक
हनुमान जी
188
कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
189
मेहंदीपुर में सजे तेरा दरबार बाला जी पारंपरिक
हनुमान जी
190
बजरंगी की पूजा से सब काम होता है लखबीर सिंह लक्खा
हनुमान जी
191
बलि बलि बजरंग बलि पारंपरिक
हनुमान जी
192
मेरे सीने में वैसे है जानकी संग राम जी पारंपरिक
हनुमान जी