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1465
उठजा छलांग मार के, सागर को लांघ दे लंका में राम नाम का, झंडा तू गाड़ दे डंका तू गाड़ दे
पारंपरिक
हनुमान जी
1466
हे अंजनी मां के लाला
पारंपरिक
हनुमान जी
1467
क्या लगे हनुमान राम तेरा क्या लागे
पारंपरिक
हनुमान जी
1468
जब भी रघुनाथ को पुकारेंगे
पारंपरिक
हनुमान जी
1469
चोला मैंने पहना है तेरे नाम का
पारंपरिक
हनुमान जी
1470
दिल चोरी साडा हो गया श्री मेहंदीपुर मंदिर में
- ठा. प्रकाश सिंह चौहान
हनुमान जी
1471
दो जहाँ की रहमतें वो पा गए
मीरा बाई
हनुमान जी
1472
पवन संग जाओ, चूड़ामणि
पारंपरिक
हनुमान जी
1473
राम जी की नगरी में आई रे बहार
पारंपरिक
हनुमान जी
1474
कपि राम दूत कहलाए
पारंपरिक
हनुमान जी
1475
हे दुख भंजन
पारंपरिक
हनुमान जी
1476
लंका में डंका बजाए गयो रे मा अंजनी का लाला, लाल लंगोटे वाला
पारंपरिक
हनुमान जी
1477
मैं तो दंदरौआ को जाऊं जाके अर्जी लगाऊं
पारंपरिक
हनुमान जी
1478
मै तो करती हूँ तेरा गुणगान बाला जी जरा रखना हमारा भी ध्यान बाला जी
पारंपरिक
हनुमान जी
1479
भजन वाली माला
मीरा बाई
हनुमान जी
1480
शिवपूजन को गोरा चली
पारंपरिक
हनुमान जी
1481
थोड़ो आज करसी थोड़ो काल करसी तनै एक दिन बालाजी मालामाल करसी
पारंपरिक
हनुमान जी
1482
यमुना के तट पर है
पारंपरिक
हनुमान जी
1483
मेरे बजरंग बाबा आजा करूं इंतजार मै भजन
ठा. प्रकाश सिंह चौहान
हनुमान जी
1484
ओ बाबा ले चल मेंहदीपुर द्वार - ठा. प्रकाश सिंह चौहान भजन
ठा. प्रकाश सिंह चौहान
हनुमान जी
1485
श्री हनुमान पच्चीसा
पारंपरिक
हनुमान जी
1486
ऐसे गरज़ रहे हनुमान
पारंपरिक
हनुमान जी
1487
बली बजरंग बली बल धारी
राजेन्द्र सिंह ज़ुबानी
हनुमान जी
1488
बजरंगबली हम आ गए हैं आपके दरबार में
पारंपरिक
हनुमान जी