॥ दोहा ॥
यशोमति मैया से बोले नंदलाला।
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला॥
॥ चौपाई ॥
बोलीं मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे।
कारी अंधियारी आधी रात को तू आया॥
लाडला कन्हैया मेरा काली रात वाला।
इसीलिए काला तू है नंदलाला॥
बोलीं मुस्काती मैया ललन को बताया।
गोरी-गोरी राधिका को तूने ही रिझाया॥
राधा के नैनन में जादू अनोखा डाला।
इसीलिए जग कहता कान्हा मुरलीवाला॥
प्रेम की पावन धारा जब उर में बहेगी।
गोरे और काले का न भेद कोई रहेगा॥
सब घट में बसे एक ही गोपाला।
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला॥
॥ दोहा ॥
यशोदा का कन्हैया, ब्रज का बसैया।
सबके मन को मोहे प्यारा कन्हैया॥