यशोमति मैया से बोले नंदलाला

पारंपरिक भजन
श्री कृष्ण भजन भजन कृष्ण
॥ दोहा ॥

यशोमति मैया से बोले नंदलाला।
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला॥

॥ चौपाई ॥

बोलीं मुस्काती मैया सुन मेरे प्यारे।
कारी अंधियारी आधी रात को तू आया॥
लाडला कन्हैया मेरा काली रात वाला।
इसीलिए काला तू है नंदलाला॥

बोलीं मुस्काती मैया ललन को बताया।
गोरी-गोरी राधिका को तूने ही रिझाया॥
राधा के नैनन में जादू अनोखा डाला।
इसीलिए जग कहता कान्हा मुरलीवाला॥

प्रेम की पावन धारा जब उर में बहेगी।
गोरे और काले का न भेद कोई रहेगा॥
सब घट में बसे एक ही गोपाला।
राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला॥

॥ दोहा ॥

यशोदा का कन्हैया, ब्रज का बसैया।
सबके मन को मोहे प्यारा कन्हैया॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाल कृष्ण की अपनी माता यशोदा से की गई मासूम बाल-जिज्ञासा और मैया के वात्सल्य भरे उत्तर का मधुर गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।