यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

यमुना जी के तीरे तीरे बंसी मधुर बजावे।
मृदुल कृष्ण के प्राणधन मोहन चित्त चुरावे॥

॥ चौपाई ॥

यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो।
सांवरे आई जइयो, कन्हैया आई जइयो॥
यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो॥

माखन मिश्री भोग लगाऊँ।
प्रेम सहित तोहे गोद बिठाऊँ॥
शीतल मंद सुहानी छाँव सांवरे आई जइयो।
यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो॥

कदम की डार पे झूला झुलाऊँ।
मधुर तान बंशी की सुनाऊँ॥
निसदिन जपू तेरो नाँव सांवरे आई जइयो।
यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो॥

मृदुल कृष्ण छवि पे बलिहारी।
आओ आओ प्यारे बांके बिहारी॥
पूरन कर दो मन के चाव सांवरे आई जइयो।
यमुना किनारे मेरो गाँव सांवरे आई जइयो॥

॥ दोहा ॥

कालिंदी तट रमण कर, सांवरिया सुकुमार।
मृदुल भाव हिय में बसो, जय जय नन्दकुमार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ब्रज गोपियों के वात्सल्य और प्रेम से परिपूर्ण यह मधुर ब्रज रस भजन श्यामसुंदर को अपने गाँव और हृदय में पधारने का निमंत्रण देता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।