वृंदावनी वेणू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥

पुच्छ पसरूनि मयूर विराजे ।

मज पाहता भासती यादवराजे ॥

तृणचारा चरूं विसरली ।

गाई-व्याघ्र एके ठायीं जाली ।

पक्षीकुळें निवांत राहिलीं ।

वैरभाव समूळ विसरली ॥

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥

ध्वनी मंजुळ मंजुळ उमटती ।

वांकी रुणझुण रुणझुण वाजती ।

देव विमानीं बैसोनि स्तुती गाती ।

भानुदासा फावली प्रेम-भक्ति ॥

वृंदावनी वेणु कवणाचा माये वाजे ।

॥ दोहा ॥

वेणुनादें गोवर्धनु गाजे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।