वृन्दावन के ओ बांके बिहारी हमसे पर्दा करो ना मुरारी

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

पर्दा डालो ना प्रभू, भक्तन पे दयाल।
देवी चित्रलेखा गावती, जय बांके गोपाल॥

॥ चौपाई ॥

वृन्दावन के ओ बांके बिहारी, हमसे पर्दा करो ना मुरारी।
हमसे पर्दा करो ना मुरारी, हमसे पर्दा करो ना मुरारी॥
वृन्दावन के ओ बांके बिहारी॥

दूर देश से चलकर आए, तेरे दर्शन की आस लगाए।
पलकें बिछाए तेरे द्वारे खड़े हैं, अपनी व्यथा तुम्हें सुनाने आए॥
अपनी नजरों से देखो गिरधारी।
हमसे पर्दा करो ना मुरारी॥

तेरे मुखड़े पे नैनन का जादू, देख के छवि दिल हुआ बेकाबू।
टेढ़े मुकुट पे ये दिल मोरा अटका, चरण शरण में आया भटका॥
कर दो कृपा हे कुंजबिहारी।
हमसे पर्दा करो ना मुरारी॥

देवी चित्रलेखा गावे हरषाई, मेरे बांके बिहारी ने सुध पाई।
पर्दा हटा के दिया दीदार, जीवन का कर दिया उद्धार॥
जय जय श्री राधे सरकार तुम्हारी।
हमसे पर्दा करो ना मुरारी॥

॥ दोहा ॥

पर्दा हटो दीदार भयो, नैनन सुख अपार।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, जय बांके सरकार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री बांके बिहारी मंदिर में झांकी दर्शन के समय पर्दा न डालने और अनवरत दर्शन देने की रसमय प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।