विसर्जन को चलीं रे, चली रे मोरी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

विसर्जन को चली रे,

चली रे मोरी मैया,

विदाई से आज मोरी,

विदाई से आज मोरी,

भर आई है अखियां,

विसर्जन को चलीं रे,

चली रे मोरी मैया ॥

नौ दिन माई तेरी सेवा में बीते,

अब कैसे विरहा की ये रैन बीते,

नौ दिन माई तेरी सेवा में बीते,

तुझ बिन लगेगी माई,

सुनी सुनी गलियां,

विसर्जन को चलीं रे,

चली रे मोरी मैया ॥

आज चली रे धाम भवानी,

सुना करके आज भवानी,

आज चली रे धाम भवानी,

जाए सही ना माई,

विरहा की घड़ियाँ,

विसर्जन को चलीं रे,

चली रे मोरी मैया ॥

रो रो कर करते है विदाई,

अगले बरस फिर आना है माई,

रो रो कर करते है विदाई,

तुझसे बिछड़ के मैया,

बन ना जाऊं मैं जोगनिया,

विसर्जन को चलीं रे,

चली रे मोरी मैया ॥

विसर्जन को चली रे,

चली रे मोरी मैया,

विदाई से आज मोरी,

विदाई से आज मोरी,

भर आई है अखियां,

विसर्जन को चलीं रे,

॥ दोहा ॥

चली रे मोरी मैया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।