विरजानंद दंडीशा

पारंपरिक
माता सरस्वती संत साहित्य Bhakt Virajanand Dandeesha Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | विरजानंद दंडीशा

वास्तविक नाम - विराजानन्द

अन्य नाम - विरजानंद दंडीशा स्वामी

गुरु - पूर्णानंद गिरि

शिष्य - दयानंद सरस्वती

जन्म - 1778

जन्म स्थान - करतारपुर, जालंधर, पंजाब

निधन - 14 सितंबर 1868 (आयु 90 वर्ष)

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - संस्कृत

प्रसिद्ध - आध्यात्मिक संत

विरजानंद दंडीशा स्वामी, जिन्हें मथुरा के अंधे ऋषि के रूप में भी जाना जाता है, आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती के प्रसिद्ध शिक्षक थे। वह संस्कृत व्याकरण और वैदिक साहित्य के विद्वान और शिक्षक थे। विरजानंद दंडीशा स्वामी, पांच साल की उम्र में चेचक के हमले से उनकी आंखों की रोशनी चली गई।

विरजानंद दंडीशा स्वामी ने मथुरा में एक पाठशाला की स्थापना की, जिसमें देश भर से छात्र आते थे। पाठशाला का खर्च राजपूत राजकुमारों के दान से पूरा किया जाता था और विद्यार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। संयोगवश, लगभग उसी समय, दयानंद सरस्वती गुरु की तलाश में पूरे देश में घूम रहे थे। दयानंद की मुलाकात 1860 में, दयानंद ने विरजानंद से मिलने के लिए मथुरा की यात्रा की। पहली मुलाकात में विरजानंद ने उनके उद्देश्य और शिक्षा के बारे में पूछा।

दयानंद ने विरजानंद के अधीन कठोर प्रशिक्षण लिया। गुरुदक्षिणा के रूप में, विरजानंद ने दयानंद से एक वचन लिया कि वह अपना जीवन हिंदू धर्म के पुनरुद्धार के लिए समर्पित करेंगे। वह देश में "आर्ष" साहित्य और वेदों के ज्ञान को फैलाने का काम करेंगे। अपनी असाधारण भक्ति और सेवा भावना के कारण, दयानन्द जल्द ही उनके सबसे प्रिय और सबसे प्रसिद्ध शिष्य बन गए।

14 सितंबर 1868 को 90 वर्ष की आयु में विरजानंद की मृत्यु हो गई। 14 सितंबर 1971 को, भारत के डाक और तार विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया, जिसमें स्वामी को बैठी हुई मुद्रा में दर्शाया गया था।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तमालः विरजानंद दंडीशा | Bhaktmal: Virajanand Dandeesha

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।