श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम्

पारंपरिक
श्री राम स्तोत्र Mantra Maa Durga Mantra
॥ पावन पाठ ॥

निशुम्भ शुम्भ गर्जनी,

प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी ।

बनेरणे प्रकाशिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

त्रिशूल मुण्ड धारिणी,

धरा विघात हारिणी ।

गृहे-गृहे निवासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

दरिद्र दुःख हारिणी,

सदा विभूति कारिणी ।

वियोग शोक हारिणी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

लसत्सुलोल लोचनं,

लतासनं वरप्रदं ।

कपाल-शूल धारिणी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

कराब्जदानदाधरां,

शिवाशिवां प्रदायिनी ।

वरा-वराननां शुभां,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

कपीन्द्न जामिनीप्रदां,

त्रिधा स्वरूप धारिणी ।

जले-थले निवासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

विशिष्ट शिष्ट कारिणी,

विशाल रूप धारिणी ।

महोदरे विलासिनी,

भजामि विन्ध्यवासिनी ॥

पुंरदरादि सेवितां,

पुरादिवंशखण्डितम्‌ ।

विशुद्ध बुद्धिकारिणीं,

भजामि विन्ध्यवासिनीं ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।