सिद्धि विनायक गणपति - लड्डुअन भोग सेवा कीर्तन

पारंपरिक भजन
श्री गणेश भजन भजन श्री गणेश
॥ दोहा ॥

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल hoy॥

॥ चौपाई ॥

सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥

नाम जपे से पाप नशावे, जन्म मरण के फेर मिटावे।
संतन के संग मन रंग लीजै, जीवन सफल बनावे॥

सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥

॥ दोहा ॥

हरि ॐ तत्सत् नारायण, वासुदेव सुख रास।
जो यह पद निशदिन सुने, पूरे मन की आस॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

यह पारंपरिक भक्ति भजन प्राचीन संत परंपरा का पावन संकलन है, जो मन को एकाग्र कर ईश्वर के शरणागत होने की प्रेरणा देता है। इस पावन भजन में श्री गणेश के मंगल कारक स्वरूप की स्तुति करते हुए साधक को अंतःकरण के विकारों से मुक्त होकर सच्चे आनंद की प्राप्ति का मार्ग दिखाया गया है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।