पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित hoy॥
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥
संत समागम परम सुहाई, जहाँ मिले अमृत की थाई।
काम क्रोध मद लोभ मिटावे, निर्मल ज्ञान समाई॥
सूरश्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
विघ्न हरण मंगल करन, श्री गणपति महाराज।
प्रथम निमंत्रण आपको, पूर्ण कीजो काज॥
कहत कबीर सुनो भाई साधो, शब्द गहो चित लाय।
हरि सुमिरन बिन मुक्ति नाहीं, जनम अकारथ जाय॥