व्यंकटेश जी की आरती

पारंपरिक
श्री राम आरती Aarti Shri Vishnu Aarti
॥ पावन पाठ ॥

शेषाचल अवतार तारक तूं देवा ।

सुरवर मुनिवर भावें करिती जन सेवा ॥

कमलारमणा अससी अगणित गुण ठेवा ।

कमलाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा ॥

जय देव जय देव जय व्यंकटेशा ।

केवळ करूणासिंधु पुरविसी आशा ॥

संतो की वाणी लिरिक्स

हे निजवैकुंठ म्हणुनी ध्यातों मी तू तें ।

दाखविसी गुण कैसे सकळिक लोकाते ॥

देखुनि तुझे स्वरूप सुख अद्‌भुत होते ।

॥ दोहा ॥

ध्यातां तुजला श्रीपति दृढ मानस होते ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।