वीतराग सर्वज्ञ हितंकर - देव स्तुति

पारंपरिक
अन्य भजन Bhajan Arya Samaj Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

वीतराग सर्वज्ञ हितंकर, भविजन की अब पूरो आस ।

ज्ञान भानु का उदय करो, मम मिथ्यातम का होय विनाश ॥

जीवों की हम करुणा पाले, झूठ वचन नहीं कहें कदा ।

परधन कबहूँ न हरहूँ स्वामी, ब्रह्मचर्य व्रत रखें सदा ॥

तृष्णा लोभ बढ़े न हमारा, तोष सुधा निधि पिया करें ।

श्री जिनधर्म हमारा प्यारा उसकी सेवा किया करें ॥

दूर भगावें बुरी रीतियाँ, सुखद रीति का करें प्रचार ।

मेल-मिलाप बढ़ावे हम सब, धर्मोन्नति का करें प्रचार ॥

सुख-दुख में हम समता धारे, रहे अचल जिमि सदा अटल ।

न्याय मार्ग का लेश न त्यागें, वृद्धि करें निज आतम बल ॥

अष्ट करम जो दुःख हेतु हैं, उनके क्षय का करें उपाय ।

नाम आपका जपें निरन्तर, विघ्न शोक सब ही टल जाय ॥

आतम शुद्ध हमारा होवे, पाप मैल नहीं चढ़ें कदा ।

विद्या की हो उन्नति हममें, धर्म ज्ञान हूँ बढ़े सदा ॥

हाथ जोड़कर शीश नवावें, तुमको भविजन खड़े-खड़े ।

॥ दोहा ॥

यह सब पूरो आश हमारी चरण-शरण में आन पड़े ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।