वक्रतुण्ड महाकाय (गणेश मंत्र)

गणेश पुराण
श्री गणेश मंत्र मंत्र गणेश
॥ दोहा ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

॥ चौपाई ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

भावार्थ:
हे घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान दिव्य तेज वाले भगवान श्री गणेश! आप कृपा करके मेरे सभी कार्यों को बिना किसी विघ्न के सदैव सफल और सिद्ध करें।

॥ दोहा ॥

ॐ गं गणपतये नमः॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में पढ़ा जाने वाला प्रथम पूज्य गणेश जी का यह महामंत्र समस्त विघ्नों को हरता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।