ऊँचे पर्वत गुफा न्यारी जहाँ मां भवन बना बैठी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी,

जहाँ मां, भवन बना बैठी ॥

दर्शन, करती है... जय हो ॥

दुनिया सारी,

जहाँ मां, ज्योत जगा बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी...

तेरे, देखे रंग न्यारे,

मां तू, लाखों पापी तारे ॥

ओ संगतें, बोलें... जय हो ॥

जय जयकारे,

सिंह पर, आसन लगा बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी...

झूले, लाल मैया का झंडा,

बहती, चरणों में गंगा।।

ओ माथे, तिलक... जय हो ॥

लगाया चंदा,

शीश पर, मुकुट सजा बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी...

चूड़ा, लाल रंग का पहना,

देखी, अजब है तेरी माया ॥

ओ आसन... जय हो ॥

गुफा में लगाया,

सोहणी मां, खेल रचा बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी...

मेहंदी, लाल रंग की लगाई,

सिर पर, चुनरी लाल सजाई ॥

ओ संगत... जय हो ॥

दर्शन करने आई,

मां तू, मौज लगा बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी...

मैया, करती शेर सवारी,

हमें, लगती बड़ी प्यारी ॥

ओ मैया... जय हो ॥

दर्शन दे एक बारी,

मुझे क्यों, याद भुला बैठी ॥

ऊँचे, पर्वत, गुफा न्यारी…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।