भजन: तुम रूठे रहो मोहन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन,

हमें मधुबन प्यारा है,

इक बार तो आ जाओ,

मधुबन ही बना देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन,

हमें राधा प्यारी है,

इक बार तो आ जाओ,

राधा से मिला देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन,

हमें माखन प्यारा है,

इक बार तो आ जाओ,

माखन ही खिला देंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम कहते हो मोहन,

हमें कहाँ बिठाओगे,

इस दिल में तो आ जाओ,

पलकों पे बिठा लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम हमको ना चाहो,

इसकी हमें परवाह नही,

हम वादे के पक्के है,

तुम्हे अपना बना लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

लगी आग जो सीने में,

तेरी प्रेम जुदाई की,

हम प्रेम की धारा से,

लगी दिल की बुझा लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

तुम रूठे रहो मोहन,

हम तुम्हे मना लेंगे,

आहों मे असर होगा,

घर बैठे बुला लेंगे,

तुम रूठे रहों मोहन,

॥ दोहा ॥

हम तुम्हे मना लेंगे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।