तुझमे शिवा मुझमे शिवा तन में शिवा मन में शिवा

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Namah Shivay Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

गंगा नाहया पर्वत को पाया तू है कहा

ये दुनिया छोड़ी मैने मन सजाया तू है कहा

तुम डरबदार की राहो में या हो कही शिवलो में

मेरे साथ ही तुम हो कही फिर क्यू नही निगाहो में

जब लाउ उठी इस दिल में तो एहसास हुआ

तुझमे शिवा मुझमे शिवा तन में शिवा मन में शिवा

ओम नमः शिवाय....

मान की गहराई में तू था चाओं में तेरी मई चला

तेरी राहो में ही खोके खुद से ही में आ मिला

अब ना रही पल की खबर जो तू मिला है इस क़दर

समा गया तुझमे कही भटका था जो ये बेसबर

हर ओर से बस एक धुन मैं सुन रहा

तुझमे शिवा मुझमे शिवा....

संतो की वाणी लिरिक्स

सत्या-असत्या में उलझी दुनिया अपने करमो से है परे

समझे ना क्यू तेरी माया तूने ही हर रूप धरे

है शोर में खामोशी तू खामोशी मेी एक नाद है

संगीत है जीवन का तू अनसुना एक राग है

आँख मूंडे भीतर ही वो है बसा

तुझमे शिवा मुझमे शिवा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।