॥ दोहा ॥
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम।
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम॥
॥ चौपाई ॥
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम।
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम॥
घायल मन का पागल पंछी, उड़ने को बेकरार।
पंख हैं कोमल आँख है धुंधली, जाना है उस पार॥
तू प्यार का सागर है...
नैया है पुरानी और तूफ़ानी रात है।
हमको किनारा दे दे, तेरी ही तो बात है॥
तू प्यार का सागर है...
जो खो गया उसे भूल जा, जो मिल गया वो सम्हाल ले।
प्रभु के चरण में शीश नवा, अपना जनम सुधार ले॥
तू प्यार का सागर है...
॥ दोहा ॥
तेरी दया का पार नहीं है, तू ही जीवन त्राता।
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम॥