तू प्यार का सागर है

पंडित नरेंद्र शर्मा
अन्य भजन भजन प्रार्थना
॥ दोहा ॥

तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम।
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम॥

॥ चौपाई ॥

तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम।
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम॥

घायल मन का पागल पंछी, उड़ने को बेकरार।
पंख हैं कोमल आँख है धुंधली, जाना है उस पार॥
तू प्यार का सागर है...

नैया है पुरानी और तूफ़ानी रात है।
हमको किनारा दे दे, तेरी ही तो बात है॥
तू प्यार का सागर है...

जो खो गया उसे भूल जा, जो मिल गया वो सम्हाल ले।
प्रभु के चरण में शीश नवा, अपना जनम सुधार ले॥
तू प्यार का सागर है...

॥ दोहा ॥

तेरी दया का पार नहीं है, तू ही जीवन त्राता।
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूँद के प्यासे हम॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ईश्वर के प्रति हृदयस्पर्शी विनम्र प्रार्थना, जो आत्मा की व्याकुलता और परमात्मा की असीम दया के प्रति पूर्ण शरणागति दर्शाती है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।