तू ना जा मेरे रघुराई

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

राजा दशरथ ने,

व्याकुल हो के,

यह आवाज़ लगाई,

तू ना जा मेरे रघुराई,

तू ना जा मेरे रघुराईं,

लो वन को चले हैं रघुराई,

राजा दशरथ ने ॥

केकई ने कैसा वर मांगा,

टूटे हैं सपने सारे,

राजतिलक था होने वाला,

होनी को कौन है टालें,

श्राप श्रवण के माता-पिता का

आज बना है दुखदाई,

लो वन को चले हैं रघुराई,

राजा दशरथ ने ॥

राम बिना मेरी सूनी अयोध्या,

कैसे अब मैं जियूँगा,

लक्ष्मण बिन मेरा दिल लगेगा,

कैसे जुदाई सहूंगा,

साथ सीता भी,

वन को चली है,

अखियां भर भर आई,

लो वन को चले हैं रघुराई,

राजा दशरथ ने ॥

राजा दशरथ ने,

व्याकुल हो के,

यह आवाज़ लगाई,

तू ना जा मेरे रघुराई,

तू ना जा मेरे रघुराईं,

लो वन को चले हैं रघुराई,

॥ दोहा ॥

राजा दशरथ ने ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।