तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है,

लखदातार है तू लीले का सवार है,

सांवरे तेरी तो लीला अपरम्पार है,

मोहना तू ही लखदातार है।

आज लगे दुनिया दीवानी तेरे नाम की,

गली गली चर्चा है खाटू वाले श्याम की,

मोहना तू ही लखदातार है ॥

सूरत पे तेरी तन मन वारा है,

नैनो के रस्ते दिल में उतारा है,

तू ही बड़ा सेठ बाबा तू ही साहूकार है,

लूटो जिसे लूटना है खुला भंडार है,

मोहना तू ही लखदातार है ॥

फागण महीने न्यारे खाटू के नज़ारे है,

गूंजे आसमान पे श्याम जयकारे है,

जो भी फरियादी आके करता पुकार है,

खाली नहीं जाता वो तो तेरा एतबार है,

मोहना तू ही लखदातार है ॥

भर भर ‘अंजलि’ सौगातें भरे रखता,

वो तर जाए जिसे प्रेम से तू तकता,

तेरे दरबार हर ‘दुआ’ स्वीकार है,

तर गया देखो ‘सरल’ जैसा गुनहगार है,

मोहना तू ही लखदातार है ॥

तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है,

लखदातार है तू लीले का सवार है,

सांवरे तेरी तो लीला अपरम्पार है,

मोहना तू ही लखदातार है।

आज लगे दुनिया दीवानी तेरे नाम की,

गली गली चर्चा है खाटू वाले श्याम की,

मोहना तू ही लखदातार है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।