तू अकेला नहीं सांवरा संग है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ज़िंदगी में भरा एक नया रंग है,

तू अकेला नहीं सांवरा संग है,

जब जब तू ठोकर खाये गा आकर मुझको बचायेगा,

अच्छी राह पे चलता चल तू सांवरा साथ निभाएगा,

ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है,

तू अकेला नहीं सांवरा संग है,

मत कर तेरा मेरा बन्दे साथ न कुछ भी जायेगा,

खाली हाथ आया तू जग में हाथ पिसारे जायेगा,

जो भी तूने किया जाये गा संग है,

तू अकेला नहीं सांवरा संग है,

शुकल दास जीवन नैया को अनुपम खेवन वन हार मिला,

मन मधुवन हो गया है जबसे श्याम पिया का प्यार मिला,

श्याम रंग दे बिन पारस बे रंग है,

लाडला भी रंगा श्याम के रंग है,

तू अकेला नहीं सांवरा संग है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।