कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माहि।
ऐसे घट घट राम हैं, दुनिया देखै नाहि॥
हारे के सहारे खाटू श्याम हमारे, लखदातार कन्हैया।
शीश के दानी शरण तुम्हारी, पार लगा दो नैया॥
फाल्गुन मेले भक्त पुकारे, निशान हाथ में सोहे।
तेरी कृपा से बिगड़े बनते, रूप अनुपम मोहे॥
मन भज ले तू पावन नाम, यही है सच्चा विश्राम।
संसार के सब रिश्ते झूठे, एक सहारा राम॥
बरसाने की लाडली श्री राधा, कृपा दृष्टि बरसाओ।
श्यामा प्यारी भानुदुलारी, हृदय कमल में आओ॥
चरण शरण की दासी बना लो, प्रेम सुधा रस दीजै।
राधा नाम रटे जो निसिदिन, भव बंधन हरि लीजै॥
तुलसीदास रघुनाथ शरण में, सदा रहे अनुराग।
जाके हृदय राम बसे हैं, सोई परम बड़भाग॥