तीनो लोको में भोले के जैसा

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ दोहा ॥

तीनो लोको में भोले के जैसा ॥

॥ चौपाई ॥

दोहा – बात सदियों से,

मशहूर है ज़माने में,

एक पल लगता है,

महादेव को मनाने में।

जिसने भोला कहा,

भर भर के ले गया झोली,

रखा छुपा के ना,

भोले ने कुछ खजाने में ॥

तीनों लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है,

कौन सा भक्त है बात उसकी,

मेरे भोले ने मानी नहीं है,

तीनों लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है ॥

बात सच्ची है करना ना शंका,

दे दी रावण को सोने की लंका,

वेद ग्रंथो में लिखा हुआ है,

कोई झूठी कहानी नहीं है,

तीनों लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है ॥

फेरी देवों ने जब शिव की माला,

देके अमृत पिया विष का प्याला,

किसको भोले ने क्या क्या दिया है,

बात कोई छुपानी नहीं है,

तीनों लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है ॥

पाप धोने थे सारे जहां के,

शिव ने गंगा हमें दे दी लाके,

शिव की करुणा भी इस में मिली है,

गंगा अमृत है पानी नहीं है,

तीनों लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है ॥

तीनो लोको में भोले के जैसा,

दूसरा कोई दानी नहीं है,

कौन सा भक्त है बात उसकी,

मेरे भोले ने मानी नहीं है,

तीनों लोको में भोले के जैसा,

॥ दोहा ॥

दूसरा कोई दानी नहीं है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।