थे झूलो री म्हारी मायड़ तो मन हरषे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दादी जी झूलो तो घालयो

थे झूलो री म्हारी मायड़ तो मन हरषे

टाबरिया थाने तो रिझावे

थे आओ तो म्हारी दादी तो मन हरषे

रंग बिरंगा फुलड़ा तो मैं लायी

थे झूलो री म्हारी मायड़ तो मन हरषे,

थारे बिना कोई जी म्हारो

म्हे थाने बुलावा दादी तो मन हरषे

उत्सव तो थारो दादी आयो

म्हारे मन को मयूरो नाचे थाने देख दादी,

झुंझनू तो पैदल मैं अस्य

ओ दादी थे तो आओ म्हारो मन हरषे

थे आओ तो म्हारी मयान तो मन हरषे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।