थारे बिन मैया कुण म्हारो है दादी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

थारे बिन मैया कुण म्हारो है,

थारे बिण मैया कुण म्हारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है ॥

आज आओ मैया,

म्हा पे उपकार करो,

कष्ट हर लो अब सारा,

म्हारो उद्धार करो,

मैया सुनो आज अर्जी म्हारी,

करूँ आज अरदास दिल से थारी,

कोई ना म्हारो आज है,

काई से नाही आस है,

इक थारो ही है आसरो,

थारो है विश्वास है,

थारो है विश्वास है,

मनड़ो थाने ही अब पुकारयो है,

दादी थारो ही अब सहारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है ॥

थारे दर पे म्हे आया,

मन में या आशा ल्याया,

आज तक थारी कृपा से ही,

काम सब होता आया,

माँ थारी शरण ही,

म्हे आवा हरदम,

लुटा दे तू खुशियां,

मिटा दे हर गम,

या जिंदगी की डोर मैया,

थारे ही हाथ है,

मिलेगी सारी खुशियां,

मिले जो थारो साथ है,

मिले जो थारो साथ है,

दास ‘अंकुश’ माँ थारो प्यारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है ॥

थारे बिन मैया कुण म्हारो है,

थारे बिण मैया कुण म्हारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है,

दादी थारो ही अब सहारो है ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।