ठाकुर अनुकूलचंद्र

पारंपरिक
विष्णु भगवान संत साहित्य Bhakt Thakur Anukul Chandra Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | ठाकुर अनुकुलचंद्र

वास्तविक नाम - अनुकुलचन्द्र चक्रवर्ती

अन्य नाम - श्री श्री ठाकुर, श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र, युग पुरूषोत्तम श्री श्री ठाकुर अनुकूल चन्द्र

जन्म - 14 सितम्बर 1888

जन्म स्थान - हेमायतपुर, ब्रिटिश भारत

वैवाहिक स्थिति: विवाहित

भाषा - हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली

पिता - श्री शिबचंद्र चक्रवर्ती

माता - श्रीमती मनमोहिनी चक्रवर्ती

पत्नी - जगत्जननि शोरोशिबाला

प्रसिद्ध - दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता, चिकित्सक

संस्थापक - सत्संग

निधन - 27 जनवरी 1969, देवघर

अनुकूल ठाकुर एक हिंदू धार्मिक व्यक्तित्व थे। वह बंगाल के शीर्ष 10 आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे। उन्हें अधिकतर सत्संग नामक आध्यात्मिक आंदोलन के प्रणेता के रूप में जाना जाता है।

ठाकुर अनुकूलचंद्र का व्यक्तित्व, जीवन और शिक्षाएं विज्ञान और आध्यात्मिकता, व्यक्तिगत पुष्टि और आत्म-परिवर्तन, व्यक्तिवाद और सामाजिक प्रतिबद्धता के बीच मध्यस्थता करती हैं, जिसने उन्हें भारतीय धार्मिक परंपरा के पैगंबरों या अवतारों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। एक डॉक्टर के रूप में अनुकुलचंद्र चक्रवर्ती ने लोगों की सेवा की, उनके अचेतन अवस्था में अन्य भाषा में बोलने के साथ-साथ अपने अनुयायियों को उनकी सलाह और मार्गदर्शन ने उन्हें एक धार्मिक नेता के रूप में स्थान दिया है।

उनके भक्त उन्हें युगपुरुषोत्तम या आधुनिक युग के पैगंबर के रूप में संबोधित करते हैं। वह बिहार (अब झारखंड) के देवघर में "सत्संग" के संस्थापक हैं। अनुकूलचंद्र की मृत्यु 27 जनवरी 1969 को हुई। भारत सरकार ने 1987 में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ठाकुर अनुकूलचंद्र | Thakur Anukulchandra

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।