था बिन दीनानाथ आंगली कुण पकड़सी जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी,

कुण पकड़सी जी सांवरा,

कुण पकड़सी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी,

म्हारी पीड़ हरो घनश्याम आज,

थाने आया सरसी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी ॥

था बिन म्हारे सिर पर बाबा,

कुंण तो हाथ फिरावे है,

सगळा मुंडो फेर के बैठ्या,

कुंण तो साथ निभावे है,

मजधारा सु बेडो कईया,

मजधारा सु बेडो कईया,

पार उतरसी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी ॥

म्हारी हालत सेठ सांवरा,

थासु कोन्या छानी रे,

एक बार थे पलक उघाड़ो,

देखो म्हारे कानि रे,

थारे देख्या बिगड़ी म्हारी,

थारे देख्या बिगड़ी म्हारी,

श्याम सुधरसी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी ॥

आंख्या सामी घोर अंधेरो,

कुछ ना सूझे आगे श्याम,

ईब के होसी सोच सोच के,

म्हाने तो डर लागे श्याम,

‘हर्ष’ म्हारे आगे को रस्तो,

‘हर्ष’ म्हारे आगे को रस्तो,

श्याम ही करसी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी ॥

था बिन दीनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी,

कुण पकड़सी जी सांवरा,

कुण पकड़सी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी,

म्हारी पीड़ हरो घनश्याम आज,

थाने आया सरसी जी,

था बिन दिनानाथ,

आंगली कुण पकड़सी जी ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।