तेरी प्रीत में मोहन मन बावरा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Krishna Kanhaiya Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरी प्रीत में मोहन,

मन बावरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है,

हमें तो कन्हैया,

तेरा आसरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है ॥

जीवन की ये कैसी छाया,

जीवन की ये कैसी छाया,

जीवन की ये कैसी छाया,

चहुँ और फैली फरेब की माया,

इक तेरा दर ही तो सबसे निराला,

कण कण यहाँ सच्चा प्यार भरा है,

प्यार भरा है,

तेरी प्रीत में मोंहन,

मन बावरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है ॥

जलती गई जब ज्ञान की ज्योति,

जलती गई जब ज्ञान की ज्योति,

मिलते गए तेरी प्रीत के मोती,

और रतन जहाँ के क्या मांगू भगवन,

प्रेम के अमृत से अंतर भरा है,

अंतर भरा है,

तेरी प्रीत में मोंहन,

मन बावरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है ॥

अब तो कन्हैया सबको बता दे,

अब तो कन्हैया सबको बता दे,

प्रीत की गंगा ऐसी बहा दे,

‘अंकुश’ कहे जमाना सच्ची मेरी भक्ति,

सच्ची है प्रीत सच्चा ये सांवरा है,

ये सांवरा है,

तेरी प्रीत में मोंहन,

मन बावरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है ॥

तेरी प्रीत में मोहन,

मन बावरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

मेरा सांवरा है,

हमें तो कन्हैया,

तेरा आसरा है,

लागि लगन तू ही,

मेरा सांवरा है,

॥ दोहा ॥

मेरा सांवरा है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।