तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार प्यारे जू

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

मंद मंद मुस्काइके, मोहि लियो ब्रजराज।
नैनन की कोरन भई, पूरण सब ही काज॥

॥ चौपाई ॥

तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार प्यारे जू।
बलिहार प्यारे जू, कुर्बान प्यारे जू॥

तेरे नैन कटीले कजरारे, तेरे घुंघराले बाल प्यारे।
तेरी मोर मुकुट की लटकन पे, बलिहार प्यारे जू॥

तेरी पीतांबर की फड़कन पे, तेरी मुरली की मधुरिम तानन पे।
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार प्यारे जू॥

॥ दोहा ॥

छवि अनूप मनमोहन की, नैनन में बस जाय।
साध्वी पूनम वारणे, कोटि मदन शरमाय॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ठाकुर श्री बांके बिहारी जी की मनमोहक मंद मुस्कान, कजरारे नैन और मोर मुकुट की अलौकिक छवि पर न्योछावर होने का परम रसिक भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।