॥ दोहा ॥
इत्र की खुशबू महके, खाटू के दरबार।
फूलों से सजा सांवरिया, लागे बड़ा सुकुमार॥
॥ चौपाई ॥
गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली।
जिसने भी देखा तुमको, वो बन गया मतवाली॥
गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली॥
माथे पे मुकुट विराजे, कानों में कुंडल चमके।
सूरत पे नैन हमारे, बारम्बार हैं अटके॥
गल मोतियन की माला, बागा सतरंगी प्यारा।
गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली॥
कन्हैया मित्तल झूम के नाचे, तेरे भवन के आगे।
दर्शन पाकर बाबा तेरे, सोए भाग हैं जागे॥
॥ दोहा ॥
खाटू धाम सुहावना, शीश दान दातार।
कन्हैया मित्तल गुण गावे, जय जय लखदातार॥