गजब मेरे खाटू वाले तेरी छवि निराली

कन्हैया मित्तल
अन्य भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

इत्र की खुशबू महके, खाटू के दरबार।
फूलों से सजा सांवरिया, लागे बड़ा सुकुमार॥

॥ चौपाई ॥

गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली।
जिसने भी देखा तुमको, वो बन गया मतवाली॥
गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली॥

माथे पे मुकुट विराजे, कानों में कुंडल चमके।
सूरत पे नैन हमारे, बारम्बार हैं अटके॥
गल मोतियन की माला, बागा सतरंगी प्यारा।
गजब मेरे खाटू वाले, तेरी छवि निराली॥

कन्हैया मित्तल झूम के नाचे, तेरे भवन के आगे।
दर्शन पाकर बाबा तेरे, सोए भाग हैं जागे॥

॥ दोहा ॥

खाटू धाम सुहावना, शीश दान दातार।
कन्हैया मित्तल गुण गावे, जय जय लखदातार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा श्याम के मनमोहक श्रृंगार, दिव्य रूप-सौंदर्य और खाटू दरबार की अलौकिक सुगंध का उल्लासपूर्ण वर्णन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।