तेरे स्वागत में मैया जी, मैंने पलके बिछाई है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Rani Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरे स्वागत में मैया जी,

मैंने पलके बिछाई है,

मैंने पलके बिछाई है

मैंने पलके बिछाई है,

चली आओ मेरी मैया,

घड़ी शुभ फिर से आई है,

तेरे स्वागत में मईया जी,

मैंने पलके बिछाई है ॥

मिली थी जो खुशी मुझको,

बिछाई राहों में तेरी,

कदम मेरे घर में रख दो माँ,

सही जाए ना अब देरी,

मेरी तकदीर में फिर से,

तुम्हारी सेवा आई है,

चली आओ मेरी मैया,

घड़ी शुभ फिर से आई है,

तेरे स्वागत में मईया जी,

मैंने पलके बिछाई है ॥

तुम्हारी किरपा से मैया,

अभी तक जो भी पाया है,

मिलाकर प्यार उसमें माँ,

भोग तेरा बनाया है,

जरा विश्राम कर लेना,

तेरी चौकी सजाई है,

चली आओ मेरी मैया,

घड़ी शुभ फिर से आई है,

तेरे स्वागत में मईया जी,

मैंने पलके बिछाई है ॥

सजा कर रख लूंगा मैया,

निशानी तेरे चरणों की,

दरश से तेरे मैया जी,

मिटेगी प्यास जन्मों की,

‘जयंत’ और ‘मंत्री’ ने मैया,

आस कब से लगाई है,

चली आओ मेरी मैया,

घड़ी शुभ फिर से आई है,

तेरे स्वागत में मईया जी,

मैंने पलके बिछाई है ॥

तेरे स्वागत में मैया जी,

मैंने पलके बिछाई है,

मैंने पलके बिछाई है

मैंने पलके बिछाई है,

चली आओ मेरी मैया,

घड़ी शुभ फिर से आई है,

तेरे स्वागत में मईया जी,

मैंने पलके बिछाई है ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।