॥ दोहा ॥
नाम जहाज भव सिंधु में, तारनहार पुनीत।
जो जपे निष्कपट मन, होवे प्रभु से प्रीत॥
॥ चौपाई ॥
तेरे नाम के सहारे मेरी नाव चल रही है।
लहरों से क्या डरना जब संग कन्हैया है॥
तू ही खिवैया मेरा तू ही सहारा।
तेरे भरोसे प्रभुजी छोड़ा जग सारा॥
तूफानों से भी मुझको मोहन तूने निकाला।
तेरे नाम के सहारे मेरी नाव चल रही है॥
॥ दोहा ॥
नाम जपंता नर तरै, कहे संत सुजान।
साध्वी पूर्णिमा गावती, श्याम नाम कल्यान॥