तेरे द्वार खड़ा भगवान, भक्त भर..

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरे द्वार खड़ा भगवान,

भक्त भर दे रे झोली ।

तेरा होगा बड़ा एहसान,

के युग युग तेरी रहेगी शान ॥

डोल उठी है सारी धरती देख रे,

डोला गगन है सारा ।

भीख मांगने आया तेरे घर,

जगत का पालनहारा ।

मैं आज तेरा मेहमान,

कर के रे मुझ से जरा पहचान ॥

भक्त भर दे रे झोली ।

॥ तेरे द्वार खड़ा भगवान...॥

आज लुटा दे रे सर्वस अपना,

मान ले रे कहना मेरा ।

मिट जायेगा पल में तेरा,

जनम जनम का फेरा रे ।

तू छोड़ सकल अभिमान,

अमर कर ले रे तू अपना दान ॥

भक्त भर दे रे झोली ।

॥ तेरे द्वार खड़ा भगवान...॥

तेरे द्वार खड़ा भगवान,

भक्त भर दे रे झोली।

तेरा होगा बड़ा एहसान,

॥ दोहा ॥

के युग युग तेरी रहेगी शान ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।